माना हर किसी के हाथ में दुआ भी – Hindi Shayary

माना हर किसी के हाथ में दुआ भी और पत्थर भी|
पर हर दिलों दिमाख पे तेरी फितरत का असर भी||

नीव की गहराई ही हर इक इमारत की बुलंदी है|
सोचने वाले क्या सोचे जब सोच ख़ुद की गन्दी है||

गर तुम्ही ने बोयें है जमीं में बारूद के मंजर|
जुबाँ मीठी पर रहे जहर बुझे मन के खंजर||

कभी कौम कभी हौदे कभी दौलत की दीवार|
शामिल सरहदो जुबानो के नफरत का संसार||

तो जायज़ होगा कैसे जहां सब नाजायज है|
इतलाफ़ के बाद की उम्मीद भी नालायक है||

इसी जमीं पे रंजिशें और होते दोस्ती के अंजुमन भी|
है अंजुमन तो गुलिस्ता जहा रंजिशें वहां अब्तर भी||

हुए जो ग़ुमराह तो रास्तों पे करो पशेमान नज़र भी|
किस्मत इत्तिफ़ाक़ नहीं, तेरी फितरत का असर भी||

Written By : Neeraj Saxena

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