चतुर खरगोश Motivational Story

दोस्तों पंचतंत्र (Panchatantra) गद्य और पद्य के क्रम में अंतर्मन की कहनियों का एक अनूठा संग्रह है जिसमे ज्यादातर पशु दन्त कथाएं सम्मिलित हैं, और इनसे हमें जीवन की हर कठिनाइयों (troubles) को समझने तथा उनको सुलझाने में मदद मिलती है । आज हम आपको एक ऐसी शिक्षाप्रद कहानी (motivational story) के बारे में बता रहे हैं  जो कि एक चतुर खरगोश (Clever Rabbit) पर आधारित है ।
चतुर खरगोश – पंचतंत्र की कहानी (Panchatantra Motivational Story)

दोस्तों बहुत समय पहले की बात है । एक वन में एक हाथियों का झुंड रहता था, इनके झुण्ड में एक सरदार होता था जिसे गजराज के नाम से जाना जाता था । गजराज के लंबी सूँढ, विशालकाय शरीर, लंबे और मोटे दांत तथा मोठे मोठे पैर थे, और उसके चिंघाड़ने से पूरा वन गूँज उठता था । गजराज अपने झुण्ड के सदस्यों का बहुत ख्याल रखता था, वह उनके सुख-दुःख में हमेशा साथ रहता था और कभी उनको किसी प्रकार की कोई समस्या नाहे होने देता था, झुण्ड के बाकी हाथी भी गजराज को बहुत प्यार करते तथा सम्मान देते थे ।

एक बार वन में बारिश न होने के कारण अकाल पड़ गया, नदी, नाले, सरोवर तथा पानी के सारे श्रोत सूख गए जिसके कारण सभी पशुओं में हाहाकार मच गया और पशु वन छोड़ कर जाने लगे । हाथियों का झुण्ड भी भोजन और पानी न मिलने के कारण व्याकुल हो उठे और एक-एक कर मरने लगे । झुण्ड के सदस्यों का इस तरह से बिना भोजन पानी के पतन होने से गजराज Chatur Khargosh - Inspirational Storyपरेशान हो उठा और हाथियों के प्राण बचाने का उपाय सोचने लगा, और एक दिन गजराज ने सभी हाथियों की एक सभा बुलाई और उनसे बोला कि सभी हाथी अलग-अलग दिषाओं में जायें और भोजन तथा पानी का पता लगायें । सभी हाथियों ने अपने गजराज की आज्ञा पा अलग-अलग दिशाओं में चले गए। कुछ समय के बाद एक हाथी लौटकर आया और गजराज से बोला कि यहाँ से थोड़ी दूरी पर एक दूसरा वन है जिसमे पानी एक बहुत बड़ा सरोवर है । उस वन में काफी हरे-भरे वृक्ष तथा फल-फूल इत्यादि हैं। यह सुनकर गजराज बहुत खुश हुआ तथा सभी हाथियों को उस वन में चलने के आदेश दिया जिससे सभी हाथियों को खाना और पानी मिल सके। सारे हाथी गजराज का आदेश पा उस वन की ओर चल पड़े, हाथी वहां पहुँचकर हरे भरे वृक्ष, फलऔर पानी पाकर बड़े प्रसन्न हुए और खाने पीने लगे।
हाथी जिस रास्ते से सरोवर में पानी पिने जाया करते थे उसी रस्ते में खरगोशों के एक बस्ती पड़ती थी, हाथी जब उस रास्ते से पानी पीने जाते तो कुछ खरगोश उनके पैरों तले आकर मर जाते और कुछ घायल हो जाते थे । हाथी रोज पानी पीने जाते और हर रोज खरगोश उनके पैरों तले मरने और घायल होने लगे। यह देखकर खरगोशों ने सोचा कि अगर हम इसीतरह से मरते और घायल होते रहे तो जल्द ही हमारी बस्ती ख़त्म हो जाएगी ।
यह सब देख और विचार कर खरगोशों के सरदार ने एक सभा बुलाई जिसमे सारे खरगोश इकठ्ठा हुए, और हाथियों के इस अत्याचार से छुटकारा पाने का उपाय सोचने लगे, तभी उनमे से एक खरगोश बोला कि यदि वे उसे खरगोशों का दूत बनाकर हाथिओं के पास भेजें तो वो इस समस्या से उनको निजात दिला सकता है। सरदार ने उस खरगोश की बात मान अपना दूत बना हाथियों के पास भेज दिया।
खरगोश हाथियों के झुण्ड के पास पहुँच गया और गजराज के पास जाने की कोशिश करने लगा किन्तु हाथियों के पैरों तले कुचले जाने के डर से वो पास के एक ऊँची चट्टान पर चढ़ गया और जोर से गजराज से बोला “गजराज मैं चन्द्रमा का एक दूत हूँ और तुम्हारे लिए उनका एक सन्देश लाया हूँ “,  चन्द्रमा का नाम सुनकर गजराज हाथी आश्चर्यचकित हुआ और खरगोश से बोला कि बोलो क्या सन्देश लाये हो मेरे लिए ?
खरगोश बोला “ये जो सरोवर का तुम पानी पीते हो वो चन्द्रमा का है और तुमलोगों ने चन्द्रमा के सरोवर के पानी को गन्दा कर दिया है और तुम्हारे झुण्ड के हाथी चन्द्रमा के खरगोशों को पैरों तले कुचलकर मार  डालते हैं, चन्द्रमा खरगोशों को बहुत प्यार करता है, तुम सभी हाथी सावधान हो जाओ नहीं तो वे तुम सबको मार डालेंगे”।
खरगोश की ये बात सच मानकर गजराज और उसके हाथी भयभीत हो गए। गजराज खरगोश से बोला तुम चन्द्रमा के दूत हो, मुझे तुरंत चन्द्रमा के पास ले चलो मैं उनसे अपने इस कृत्य, अपराध के लिए क्षमा की भीख मांगूंगा।
खरगोश ने गजराज की बात मन ली पर एक शर्त रखी कि गजराज को अकेले ही चलना पड़ेगा, गजराज मान गया।
अगली पूर्णिमा की रात जब आकाश में चन्द्रमा अपनी पूरी रौशनी बिखेर रहा था तब खरगोश गजराज को सरोवर के पास ले गया। खरगोश ने सरोवर के पानी में चन्द्रमा के प्रतिंबिंब को दिखाकर गजराज से बोला लो मिलो चन्द्रमा से, और क्षमा प्रार्थना करो। पानी में पूर्णिमा के चाँद के प्रतिंबिंब को गजराज ने चन्द्रमा मानकर अपनी सूंड क्षमा मांगने लिए पानी में जैसे ही डाली तो लहर उत्पन्न होने से चन्द्रमा का प्रतिंबिंब गायब हो गया। गजराज डर कर खरगोश से बोला कि “दूत चन्द्रमा कहाँ गायब हो गए?”
यह देखकर खरगोश बोला कि चन्द्रमा तुमसे नाराज हो गए हैं “तुमने उनके सरोवर के पानी को गन्दा किया है और उनके खरगोशों को अपने पैरों तले कुचलकर मर डाला है, इसलिए चन्द्रमा तुमसे नहीं मिलना चाहते हैं”।
गुजराज ने खरगोश की बात सत्य मानकर और डर कर पूछा कि “क्या कोइ ऐसी युक्ति है जिससे चन्द्रमा हमसे प्रसन्न हो जाएँ ?” यह सुनकर खरगोश बोला हाँ एक युक्ति है जिससे चन्द्रमा तुमपर प्रसन्न हो सकते हैं, तुम्हे कल तड़के सुबह ही अपने सभी हाथियों के साथ ये वन छोड़कर जाना होगा। गजराज मान गया और प्रायश्चित करने के लिए सुबह ही वन छोड़ कर अपने सभी साथियों के साथ चला गया।
इस प्रकार खरगोश की सूझ बूझ और चालाकी की वजह से सभी खरगोशों की जान बच गयी ।
दोस्तों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि चाहे कितनी भी बड़ी समस्या क्यों ना हो, हम धैर्य और सूझ बूझ से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान कर सकते हैं। जीवन में समस्याओं से डरने के बजाये सूझबूझ से सामना करना चाहिए।

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