कविताएँ Archive

ख़ामोश भी है जुबान – Very Touching Hindi Poem

ख़ामोश भी है जुबान, समझने लगा हूँ, किताबो के संग, चेहरे भी पढने लगा हूँ, अब शायद जिंदगी समझ आ गयी है मुझको, वक़्त बे वक़्त साथ उसके चलने लगा हूँ, कौन जाने किसके मुक़द्दर मै क्या है “भावनाथ”!! मै तो अपना मुक़द्दर खुद लिखने चला हूँ, मै तो अपना मुक़द्दर खुद लिखने चला हूँ!!

महज दो साँस की दूरी पे जिंदगी और मौत है…

महज दो साँस की दूरी पे जिंदगी और मौत है| आज सफर ख़ुशनुमा तो कल परेशानी बहुत है|| दो पल में बदलते हालात क्यों ग़फ़लत में जिए| बाद बस रह जाएंगे जो भी अफसाने है किए|| बेवज़ह की तू तू मैं मैं से क्यों मन में खोट है| जी ले हँसी ख़ुशी तो यही हासिल

माना हर किसी के हाथ में दुआ भी – Hindi Shayary

माना हर किसी के हाथ में दुआ भी और पत्थर भी| पर हर दिलों दिमाख पे तेरी फितरत का असर भी|| नीव की गहराई ही हर इक इमारत की बुलंदी है| सोचने वाले क्या सोचे जब सोच ख़ुद की गन्दी है|| गर तुम्ही ने बोयें है जमीं में बारूद के मंजर| जुबाँ मीठी पर रहे

मैं हैरान था मैं बेहद परेशान था – Very Touching Poem in Hindi

मैं हैरान था मैं बेहद परेशान था| जिंदगी के हर मोड़ इम्तहान था|| वक्त के साथ बदलते हुए हालात| दिन पे दिन एक नये मुश्किलात|| आज जिन्हें देख कर घबराता हूँ| अपनी ही परछाई से कतराता हूँ|| बेबस ख़ुद को हारा हुआ पाता हूं| ये सोच असमंजस में पड़ जाता हूं|| कैसे घर की हर

यूँ ही पेड़ कहाँ उगते है, बीज ही रोपे जाते है – Motivational Poem in Hindi

यूँ ही पेड़ कहाँ उगते है, बीज ही रोपे जाते है| <br> जो अंधकार भू के सीने से अँकुरित हो जाते है||<br><br> स्वतः कुछ पाने की चाहत करना ही बेकार है|<br> यदि धैर्य धरो तो जीवन में सब कुछ साकार है||<br><br> घाव उधेड़े ही भरता है वरना सेते तो नासूर है|<br> हो समय से शल्य

दो चार बार हम जो कभी हँस-हँसा लिए – Hindi Shayri

दो चार बार हम जो कभी हँस-हँसा लिए| सारे जहाँ ने हाथ में पत्थर उठा लिए|| रहते हमारे पास तो ये टूटते जरूर| अच्छा किया जो आपने सपने चुरा लिए|| चाहा था एक फूल ने तड़पे उसी के पास| हमने खुशी के पाँवों में काँटे चुभा लिए|| सुख, जैसे बादलों में नहाती हों बिजलियाँ| दुख,

बेपनाह आरजू थी दिल में – Hindi Shayari

बेपनाह आरजू थी दिल में| मेरा दिल प्यार तुझी से करता था|| फुर्सत हो या न हो| वक्त चुराने को दिल करता था|| देर तलक चौराहे पर| राह निहारने को जी करता था|| एकतरफा था प्यार मेरा| पर दिल न समझाये समझता था|| याद है मुझको आज भी| जब वक्त तेरी गलियों में गुजरता था||

मधुशाला-Madhushala

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा, सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।१। प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूर्ण निकालूँगा हाला, एक पाँव से साकी बनकर नाचूँगा लेकर प्याला, जीवन की मधुता तो तेरे ऊपर
error: